कहा है तू राज
कहा गई तेरी आवाज
जल रही है मुंबई
जल रहा है ताज
आतंकवादियो ने दिखाई है
तुझे तेरी औकात
निरीहों पे तू चिल्लाता है
कहर उनपर बरपाता है
तोड़ रहा अखंडता को
राष्ट्र मे नई सीमाये बनता है
जब आन पड़ी विपदा ख़ुद पर
चूहे की तरह बिल मे दुबक जाता है
मुंबई मे विध्वंश मचा है,
कहा है तेरी नवनिर्माण सेना?
ध्वंश का तू साथी है
विषवमन तेरा हथियार
दक्कन मुज्जहिद्दीन ने
दिखा दी है तेरी औकात
मेरी कविताएँ, मेरा संसार, कागज पर उकेरे गए मेरे दिल के अहसास, खाली वक्त के मेरे साथी, मेरे एकांत के सखा, वो आवाज जो कोई सुन न सका, जिसे किसी को सुना ना सका.....
Thursday, November 27, 2008
Friday, August 22, 2008
मेरे हिस्से टूटी छानी
सोंधी खुशबू मिटटी वाली
भरी हुई कांच की प्याली
फागुन की मतवाली चाले
गूंज रही भौरों की बोली
मेरे हिस्से टूटी छानी, एक दर की दिवार सही
चंदन वाला वन उसको दे
कुबेर वाला धन उसको दे
मन्दिर की प्रतिमा उसको लिख
मस्जिद की गरिमा उसको लिख
मालिक पर्व अभावो वाला, पीडा का त्यौहार मुझको दे
यह सारा आकाश उसको दे
माँ का प्यार उसको दे
बचपन का संसार उसको लिख
जिंदगी का व्यापार उसको लिख
मेरे हिस्से बिखरे आंसू, जज्बातों का व्यापार सही
इन्द्र का सिंहासन उसको दे
एरावत का आसन उसको दे
कैलाश का वास उसको लिख
मानसरोवर का प्रवास उसको लिख
मौला मेरे हिस्से बासी रोटी, एक अदद अचार सही
भरी हुई कांच की प्याली
फागुन की मतवाली चाले
गूंज रही भौरों की बोली
मेरे हिस्से टूटी छानी, एक दर की दिवार सही
चंदन वाला वन उसको दे
कुबेर वाला धन उसको दे
मन्दिर की प्रतिमा उसको लिख
मस्जिद की गरिमा उसको लिख
मालिक पर्व अभावो वाला, पीडा का त्यौहार मुझको दे
यह सारा आकाश उसको दे
माँ का प्यार उसको दे
बचपन का संसार उसको लिख
जिंदगी का व्यापार उसको लिख
मेरे हिस्से बिखरे आंसू, जज्बातों का व्यापार सही
इन्द्र का सिंहासन उसको दे
एरावत का आसन उसको दे
कैलाश का वास उसको लिख
मानसरोवर का प्रवास उसको लिख
मौला मेरे हिस्से बासी रोटी, एक अदद अचार सही
Monday, August 18, 2008
सुन्दरता
अंगो का ये लावण्य अतुल
यह रूप राशि शुचि
परम सुघर!
मन मंत्र पाठ सा
करे यही,
सुंदर है
तू अतिशय सुंदर।
मुख चंद्र लगे मुझको तेरा
दो आँखे चमक रहे तारे
नासिका सुभग नभ गंगा सी
बालों को घेरे अंधियारे।
हंसते ही अरुणिम आभा से
थोड़ा आँखों का खुल जाना
दांतों की धवल रश्मियों मे
फिर रंग गुलाबी घुल जाना
तुम्हारा यह रूप मुझे
अक्सर ले जाता है अमराइयों मे
जहा मिले थे हम प्रथम कभी
तरु की शीतल परछाइयों मे
यह रूप राशि शुचि
परम सुघर!
मन मंत्र पाठ सा
करे यही,
सुंदर है
तू अतिशय सुंदर।
मुख चंद्र लगे मुझको तेरा
दो आँखे चमक रहे तारे
नासिका सुभग नभ गंगा सी
बालों को घेरे अंधियारे।
हंसते ही अरुणिम आभा से
थोड़ा आँखों का खुल जाना
दांतों की धवल रश्मियों मे
फिर रंग गुलाबी घुल जाना
तुम्हारा यह रूप मुझे
अक्सर ले जाता है अमराइयों मे
जहा मिले थे हम प्रथम कभी
तरु की शीतल परछाइयों मे
Thursday, July 10, 2008
शहीद
तुममे गर है अहसास कही
बन कर दिखलावो उनकी बैसाखी
टूट गई असमय जिनकी
चिरसंचित बुढापे की लाठी
जुड़ना है तो जुडो उनसे
बिछड़ गए जंग मे अपने जिनसे
रो रो कर जिनकी आँखे है लाल
पूछ लो यारो, जरा उनका भी हाल
मंच पर खड़ा हो चिल्लाते हो
सुंदर शब्दों से बहलाते हो
आँखों से चंद कतरे बहा कर
ढेर सारी तालियाँ पाते हो
पर क्या मिलता है उनको
मिट गए जिनके अरमान
बच्चे ढूंढ़ रहे पिता को
पत्नी माथे का सम्मान
शहादत कहो या कुर्बानी
मरना तो बस मरना है
बंद हो जाती है
जोशों की हर रवानी
टूट जाते है जाने कितने
बच्चे, बुढे और परिवार
शहीदों का गर है मान तुझे
सच्चों की है पहचान तुझे
ख़ुद को बनावो कुछ ऐसा
उनके मन को पहचान सको
बच्चों को अपना मान सको
बोलो नही कर के दिखालावो
बिछड़ गया जो, मिल नही सकता
महसूस न हो ऐसा, कर के दिखालावो
शहीदों की सच्ची श्रध्दाजलि है
कुछ अलग कर के दिखालावो
बन कर दिखलावो उनकी बैसाखी
टूट गई असमय जिनकी
चिरसंचित बुढापे की लाठी
जुड़ना है तो जुडो उनसे
बिछड़ गए जंग मे अपने जिनसे
रो रो कर जिनकी आँखे है लाल
पूछ लो यारो, जरा उनका भी हाल
मंच पर खड़ा हो चिल्लाते हो
सुंदर शब्दों से बहलाते हो
आँखों से चंद कतरे बहा कर
ढेर सारी तालियाँ पाते हो
पर क्या मिलता है उनको
मिट गए जिनके अरमान
बच्चे ढूंढ़ रहे पिता को
पत्नी माथे का सम्मान
शहादत कहो या कुर्बानी
मरना तो बस मरना है
बंद हो जाती है
जोशों की हर रवानी
टूट जाते है जाने कितने
बच्चे, बुढे और परिवार
शहीदों का गर है मान तुझे
सच्चों की है पहचान तुझे
ख़ुद को बनावो कुछ ऐसा
उनके मन को पहचान सको
बच्चों को अपना मान सको
बोलो नही कर के दिखालावो
बिछड़ गया जो, मिल नही सकता
महसूस न हो ऐसा, कर के दिखालावो
शहीदों की सच्ची श्रध्दाजलि है
कुछ अलग कर के दिखालावो
Wednesday, June 11, 2008
माँ
ना जाउँ मैं यमुना तीरे
ना ही राधा के गावं
प्यारी लगे माँ मुझको
तेरे आंचल की छाव
ना जाउँ पत्थर पूजने,
बाग मे चुनने फूल
भली लगे माँ मुझको
तेरे चरणों की धुल
मां, तेरी महिमा है आपर
जनता है सब संसार
गणपति ने मन इसको
पाया प्रथम पूज्य अधिकार
तेरे आँचल मे माँ
मेरा संसार बसा है
तेरे चरणों मे माँ
मेरा जीवन आधार छुपा है
ना ही राधा के गावं
प्यारी लगे माँ मुझको
तेरे आंचल की छाव
ना जाउँ पत्थर पूजने,
बाग मे चुनने फूल
भली लगे माँ मुझको
तेरे चरणों की धुल
मां, तेरी महिमा है आपर
जनता है सब संसार
गणपति ने मन इसको
पाया प्रथम पूज्य अधिकार
तेरे आँचल मे माँ
मेरा संसार बसा है
तेरे चरणों मे माँ
मेरा जीवन आधार छुपा है
Wednesday, June 4, 2008
रात है काली
भूख और रोटी समय की सवाली
गरीबी बन गई सबसे बड़ी गाली
जन्म नही ले पाती है लड़की
भ्रूण की किस्मत मे है नाली
भय, आतंक, अपहरण और हत्या
हर तरफ़ भरे है मवाली
चारो तरफ़ मॉल भरा है
मेरे सामने है टूटी थाली
कहा ख़रीदे सुख और सपने
हर किसी की जेब है खाली
दिन का सूरज धुंधला दिखता
अभी आने वाली रात है काली
गरीबी बन गई सबसे बड़ी गाली
जन्म नही ले पाती है लड़की
भ्रूण की किस्मत मे है नाली
भय, आतंक, अपहरण और हत्या
हर तरफ़ भरे है मवाली
चारो तरफ़ मॉल भरा है
मेरे सामने है टूटी थाली
कहा ख़रीदे सुख और सपने
हर किसी की जेब है खाली
दिन का सूरज धुंधला दिखता
अभी आने वाली रात है काली
खुशनसीबी
खुशनसीबी प्रश्नचिंह बन जाती है
जब कोई कहता है
बड़े खुशनसीब है आप
बहन नही है...
झूठ
झूठ
सच का अपभ्रंस है
इसमे भी सच्चाई का अंश है
जब कोई कहता है
बड़े खुशनसीब है आप
बहन नही है...
झूठ
झूठ
सच का अपभ्रंस है
इसमे भी सच्चाई का अंश है
Tuesday, June 3, 2008
Monday, June 2, 2008
अरमान
बड़े अरमान से बुने थे
सपने जो जीवन के
स्याह परछाइयों मे
पुरा अरमान होता रह गया
मिटटी की सोंधी महक
धुल मे गुजरे साल थे
खेतिहर कहलाने की चाह मे
गैरमजरुआ भूमि पर
धान होता रह गया
जिन्दगी की धुप छाह
गुजरे जिसकी आश मे
किश्तों मे पुरा वह
मकान होता रह गया
सबकुछ लुटा कर चाह थी
जिन्दगी को जानने की
कहने सुनाने मे ही
सुबह से शाम होता रह गया
सपने जो जीवन के
स्याह परछाइयों मे
पुरा अरमान होता रह गया
मिटटी की सोंधी महक
धुल मे गुजरे साल थे
खेतिहर कहलाने की चाह मे
गैरमजरुआ भूमि पर
धान होता रह गया
जिन्दगी की धुप छाह
गुजरे जिसकी आश मे
किश्तों मे पुरा वह
मकान होता रह गया
सबकुछ लुटा कर चाह थी
जिन्दगी को जानने की
कहने सुनाने मे ही
सुबह से शाम होता रह गया
Monday, May 26, 2008
नववर्ष
नववर्ष स्वागत है तुम्हारा
हत्या, भय संशय औ'
अराजकता की गोद मे
डूबा है जग सारा
नववर्ष स्वागत है तुम्हारा
राजनीत के सेज पर
सज रही नित नई बिसते
अस्त हो रही व्यवस्थाये
धूमिल हुआ उत्साह सारा
नववर्ष स्वागत है तुम्हारा
आग लगी जेपी के सपनों को
उनकी अपनी ही संतानों से
नीरो चैन की बंशी बजाता
जल रहा प्रान्त सारा
नववर्ष स्वागत है तुम्हारा
दिन के सन्नाटे मे
गूंजता झिन्गुरों की झंकार
आतंक की बेडियों मे
जकडा है जग सारा
नववर्ष स्वागत है तुम्हारा
अभिषेक आनंद - नववर्ष के आगमन पर लिखी गई कविता
Thursday, May 22, 2008
याद
मानव जीवन यादों का सफर
सफर जीने का बहाना है
कभी खुशी कभी गम
कभी अश्क बहाना है
घर छूटा बचपन छूटा
छूटे नेह भरे हाथ
जीवन के सफर मे
छुट गए जाने कितने साथ
यादों के सफर मे उमड़ आती
स्मृतियों की खान
याद आती स्नेह भींगी आँख
पखेरुओं की क्षितिज उडान
याद आता मुझे
आपना छोटा सा गांव
याद आती पीपल की छाव
सागवान पर छिटकी सिंदूरी शाम
लव-कुश का क्रिडांगन
शिव का पुण्य धाम
याद आते मुझे
इतिहास ध्वनित नाम
गज़ ग्राह मन्दिर मे
व्यतीत उपेक्षित शाम
याद आती मुझे वो धरती
जहा सीता को मिला सम्मान
जहा बीता मेरा बचपन अनजान
जीवन तो यहा भी है
है संग और साथ
पर बचपन की यादें
जन्मभूमि की सोंधी महक
जिसने सींचा मुझे
उसका कितना है मुझ पर हक़?
जहा हूँ मैं वो भी तो मेरा देश
पर मन कहता है ये परदेश
मेरे संग है रहते मेरे सहवासी
फिर भी कहलाता हूँ प्रवासी
यहा भी संग मेरे समुदाय
पर लगता है हूँ मैं असहाय
सोंचता हूँ तो विचलित होता है मन
तोड़ना चाहता है हर बन्धन
पर बेबस लाचार
अर्थ के चक्कर मे पिसता हूँ
यद्यपि मन करता है चीत्कार
मुझे नही चाहिए सुख सुविधायें
भोग और विलास
समय का घुमाता पहिया
पंहुचा दे मुझे
मेरी जन्मभूमि
मेरी माँ के पास...
सफर जीने का बहाना है
कभी खुशी कभी गम
कभी अश्क बहाना है
घर छूटा बचपन छूटा
छूटे नेह भरे हाथ
जीवन के सफर मे
छुट गए जाने कितने साथ
यादों के सफर मे उमड़ आती
स्मृतियों की खान
याद आती स्नेह भींगी आँख
पखेरुओं की क्षितिज उडान
याद आता मुझे
आपना छोटा सा गांव
याद आती पीपल की छाव
सागवान पर छिटकी सिंदूरी शाम
लव-कुश का क्रिडांगन
शिव का पुण्य धाम
याद आते मुझे
इतिहास ध्वनित नाम
गज़ ग्राह मन्दिर मे
व्यतीत उपेक्षित शाम
याद आती मुझे वो धरती
जहा सीता को मिला सम्मान
जहा बीता मेरा बचपन अनजान
जीवन तो यहा भी है
है संग और साथ
पर बचपन की यादें
जन्मभूमि की सोंधी महक
जिसने सींचा मुझे
उसका कितना है मुझ पर हक़?
जहा हूँ मैं वो भी तो मेरा देश
पर मन कहता है ये परदेश
मेरे संग है रहते मेरे सहवासी
फिर भी कहलाता हूँ प्रवासी
यहा भी संग मेरे समुदाय
पर लगता है हूँ मैं असहाय
सोंचता हूँ तो विचलित होता है मन
तोड़ना चाहता है हर बन्धन
पर बेबस लाचार
अर्थ के चक्कर मे पिसता हूँ
यद्यपि मन करता है चीत्कार
मुझे नही चाहिए सुख सुविधायें
भोग और विलास
समय का घुमाता पहिया
पंहुचा दे मुझे
मेरी जन्मभूमि
मेरी माँ के पास...
Tuesday, May 20, 2008
वृक्ष
वृक्ष
तुम इतने निष्ठुर क्यों हो
अनजानी, अनचाही लताएँ
उग आती हैं जो पास तुम्हारे
प्यार से उन्हें
गले लगते हो
परन्तु
हवा के झोकों से
वर्षा के वेग से
तुम्हारे अपने
पतित है जो भूमि पर
उनसे इतनी अपेक्षा
क्यों दिखाते हो ।
अभिषेक आनंद - पुराने पन्नों से...
Saturday, May 17, 2008
बन्धन
Friday, May 16, 2008
एक चेहरा

चेहरा (जिसे भुलाना भ्रम होगा)
जिसने मुझे इस हद तक
बेचैन किया
कि मेरी कविता
शब्द से उठकर भाव बन गई
इक चेहरा,
जो नही है महज चेहरा
पर चेहरा शरीर नही होता
यह तो फकत होता है एक चेहरा
जिसे रख भी नही सकते अपने पास
चेहरा शरीर तो नही
पर जुड़ा होता है एक शरीर से
चाह कर भी अलग नही हो सकता
इसकी पहचान है शरीर से
और शरीर की पहचान है चेहरा
चेहरा
दिल का आइना होता है
पर दिल नही होता
दिल मे होती है भावनाये
चेहरा भावों का दर्पण होता है
चेहरा
कुछ नही होता
चेहरा भी नही
यह तो भ्रम होता है
भ्रम भी नही
भ्रम की परछाई होता है चेहरा
पर चेहरा कुछ तो होता है
तभी तो मेरी कविता
शब्द से उठ कर भाव बन जाती है
अभिषेक आनंद
जिसने मुझे इस हद तक
बेचैन किया
कि मेरी कविता
शब्द से उठकर भाव बन गई
इक चेहरा,
जो नही है महज चेहरा
पर चेहरा शरीर नही होता
यह तो फकत होता है एक चेहरा
जिसे रख भी नही सकते अपने पास
चेहरा शरीर तो नही
पर जुड़ा होता है एक शरीर से
चाह कर भी अलग नही हो सकता
इसकी पहचान है शरीर से
और शरीर की पहचान है चेहरा
चेहरा
दिल का आइना होता है
पर दिल नही होता
दिल मे होती है भावनाये
चेहरा भावों का दर्पण होता है
चेहरा
कुछ नही होता
चेहरा भी नही
यह तो भ्रम होता है
भ्रम भी नही
भ्रम की परछाई होता है चेहरा
पर चेहरा कुछ तो होता है
तभी तो मेरी कविता
शब्द से उठ कर भाव बन जाती है
अभिषेक आनंद
Monday, May 12, 2008
तमस

घर का कोना कोना सूना है
ह्रदय मे तम की वीरानी है
चाहुओर दीप उजियारा है
अपनी दीवाली काली है
रहता था अँधेरा जो मेरे मन मे
उतर आया है घर आँगन मे
हर अटारी दीप सजे, औ' रंगोली है
अपना तो मन भींगा, आँखे गीली है
चहुँ ओर धूम धडाका, शोर मचा है
लक्ष्मी की सवारी आई है
अपने घर मे गहन सन्नाटा
अभी अभी हुई अन्तिम विदाई है
अभिषेक आनंद - पुराने पन्नों से (दीवाली : जब बड़े पापा के स्वर्गवास हुआ था)
ह्रदय मे तम की वीरानी है
चाहुओर दीप उजियारा है
अपनी दीवाली काली है
रहता था अँधेरा जो मेरे मन मे
उतर आया है घर आँगन मे
हर अटारी दीप सजे, औ' रंगोली है
अपना तो मन भींगा, आँखे गीली है
चहुँ ओर धूम धडाका, शोर मचा है
लक्ष्मी की सवारी आई है
अपने घर मे गहन सन्नाटा
अभी अभी हुई अन्तिम विदाई है
अभिषेक आनंद - पुराने पन्नों से (दीवाली : जब बड़े पापा के स्वर्गवास हुआ था)
मेरी कविता
रूठ गए है अपने हम से
बिसर गए सपने नयन से
टीस रहे है घाव ह्रदय के
पिघल रहे नीर नयन से
कही नही सुरभि जीवन मे
बसता है दर्द मन के अगन मे
जीवन है जब भावों से रीता
मैं क्या लिखूं कोई कविता
अभिषेक आनंद - पुरानी पन्नों से
बिसर गए सपने नयन से
टीस रहे है घाव ह्रदय के
पिघल रहे नीर नयन से
कही नही सुरभि जीवन मे
बसता है दर्द मन के अगन मे
जीवन है जब भावों से रीता
मैं क्या लिखूं कोई कविता
अभिषेक आनंद - पुरानी पन्नों से
Sunday, May 11, 2008
प्रवासी
पश्चिम से जब चलती है हवाएँ 
तुमसे कुछ कहती है हवाएँ
सुनना बेटा कान लगा कर
गुनना बेटा ध्यान लगा कर
इनमे छुपी है कुछ कथाएँ
कितने आंसू कितनी व्यथाएं
टूट गए जो जड़ से अपने
छुट गए जो घर से अपने
होठों पर होती है हँसी
दिल मे होता है रुदन
याद आती है उन्हें भी
अपनी धरती अपना वतन
रोज़ी रोटी के लिए मजबूर है
पर सारी दुनिया मे मशहूर है
तिलीस्मों सी इनकी कहानी है
ह्रदय मे एक रवानी है
देश तजा पर संस्कृति नही
परदेश मे भी हिन्दुस्तानी है...
अभिषेक आनंद - पुराने पन्नों से

तुमसे कुछ कहती है हवाएँ
सुनना बेटा कान लगा कर
गुनना बेटा ध्यान लगा कर
इनमे छुपी है कुछ कथाएँ
कितने आंसू कितनी व्यथाएं
टूट गए जो जड़ से अपने
छुट गए जो घर से अपने
होठों पर होती है हँसी
दिल मे होता है रुदन
याद आती है उन्हें भी
अपनी धरती अपना वतन
रोज़ी रोटी के लिए मजबूर है
पर सारी दुनिया मे मशहूर है
तिलीस्मों सी इनकी कहानी है
ह्रदय मे एक रवानी है
देश तजा पर संस्कृति नही
परदेश मे भी हिन्दुस्तानी है...
अभिषेक आनंद - पुराने पन्नों से
सन्नाटे की आवाज
मेरा प्यार
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